गुरुवार, 28 जून 2012

रातों को नींद नहीं आती है...


रातों को नींद नहीं आती है ,
सहमा-सहमा सा बीतता है हरेक पल,
जलती हुई सूजी बोझिल आँखें,
पर नींद गुमनाम सी गुमशुदा,
कोई काम पूर्ण हो ऐसा नहीं है,
इधर-उधर की सोच में उलझता हूँ,
अकेलापन धीरे-धीरे मार रहा मुझे,
नियमित दिनचर्या और अनुशासन भंग कर,
सूखे गले और मुरझाते तैलीय चेहरे ,
हर बार तर करता हूँ,
बाहर की गैलरी में थोड़ी देर टहलता हूँ.
पर कमबख्त नींद नहीं आती है.

एक खड्का-सा लगता है,
चौंकता हूँ अपनी जगह पर बैठे-बैठे,
सहसा एक नजर खिड़की की तरफ,
रात एक टक निहारे जा रही है बाहर से,
कोई खुशबू सी आती है रह- रहकर,
दरवाजे पर रतजगी रातरानी से,
मानों किसी प्रियतम के इंतजार में बैठी हो,
नहा-धो खुले केशों संग गमकती हुई,
धत्! ऐसा नहीं कहते रात में,
अपशकुन होता है, बुरा साया पड़ता है,
कौन समझाए भला कि इससे बुरा क्या ?
जब रातों को नींद नहीं आती है.

5 टिप्‍पणियां:

poonam ने कहा…

bahut khubsurat...

Swarda saxena ने कहा…

Bht acha neerav ji..rato ko neend nhi ati h to aisa hi hota h wajah chahe sabki alag alag ho..nice creation..

Subodh Kumar ने कहा…

Navneet Ji, as usual nice.

Noopur ने कहा…

Beautiful. . .

Leo ने कहा…

nindia rani......
nindia rani hain bari natkhat si..
chalti hain owah khud ki marji se
kahan jae ,kaha aye, na hain kisiko pata -
kisiko sir chum kar odha de khudki anchal
toh kisiko na de thodi si chhuan...
eya baat to nehi kisiko pata -
hain uski niraali yeahi adah....


saya....
saya to na kabhi bura hoti hain na bhala hota hain...
saya to saya-i hain...
yeah dunia hi hain
jo saya ko bhala bura kahan
yeah bhala bura toh nehi hain kuch...
owajah hain sirf, sirf dunia chalane ka...