
बागों में विचारना हमारी चाहत नहीं ,
समंदर की लहरों 'औ' अनजानी राहों पर,
सबको गीत सुनाना हमारी चाहत नहीं।
हमारी चाहत तो है बस एक ही,
शाम ढले नीड़ों में लौटने की,
जहाँ की हर खुशियाँ समेटे हुए,
चुग्गा और दानों की तलाश कर,
जहाँ बच्चे इंतजार करते हमारा,
प्यार की चाहत में चोंच खोल कर।
-नवनीत नीरव-
4 टिप्पणियां:
PYAAR ki chaht me CHONCH khol kar.................
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bahut sundar.
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kripya shabdkar@gmail.com par RACHANAYEN bhej kar sahyog karen.
aabhar
ultimately ghosle mein wapas aana hi padta hain.. good one
sundar abhivykti.
kuch khaas nahi lagi
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