शनिवार, 23 मई 2009

अपने......

(मैंने अपने सीनियर्स के फेयरवेल पर कुछ पन्तियाँ लिखीं थीं जो आज मैं आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ।)

चल, चल के देख लें उनको,
अभी जो अपने थे।
सुबह गुलाबी धूप से,
रातों में,
आंखों के सपने थे।

माना सफर नहीं था,
मीलों का ,
माना कोई शिकारा था,
झीलों का
चंद लम्हों का यह सफर,
बना गए यादगार,
कुछ आगे बढ़ने की सीख,
कुछ आपके विचार

तुम्हीं से रोशन थी सारी फिजां,
खुशी से चहकती थी हर दिशा,
अब तो यही लगता है ,
खुशियाँ घर छोड़ चलीं,
अब तो यही लगता है ,
गलियां भी मुँह मोड़ चलीं
रह गए यहाँ पर,
कुछ बिखरे सामान,
तुम, तुम्हारी यादें और ,
सूना ये जहाँ ।।

- नवनीत नीरव -

14 टिप्‍पणियां:

woyaadein ने कहा…

अच्छी रचना....लिखते रहिए...

वैसे एक बात काबिल-ए-गौर है कि चाहे हम अपने सीनिअर्स से लम्बे समय से कोई संवाद ना भी रखते हों, फिर भी उनके बिछड़ने पर सारी पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं.

मिलना और बिछुड़ना तो प्रकृति के नियम हैं,
मिलने की ख़ुशी जहाँ, वहीँ बिछड़ने का ग़म है.

साभार
हमसफ़र यादों का.......

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत बढ़िया और फेयर वेळ के मौके पर जंचती हुई कविता

"SHUBHDA" ने कहा…

kuch aage badne ki seekh, khuch aape vichar......
Himmat dene vali aapki ek aur baat... kisi rahat se kam nahi. Thanks

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया पंक्तियां हैं.

श्यामल सुमन ने कहा…

बहुत खूब।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Priya ने कहा…

Bahut sunder! aapne to hamari farewell yaad dila di

SWAPN ने कहा…

vidaai ke liye likhi gai sunder rachna. navneet badhai sweekaren.

mere blog par aane aur comment ke liye dhanyawaad.

ek geet maine bhi apne senior ki vidaai men likhatha meri 14.12.2008 ki post dekhen.

aap gaye kya is gulshan se jyon basant hi chali gai
phoolon ka rang pheeka pad gaya
shakha shakha chhali gai

dhanyawaad

vandana ने कहा…

waw bahut hi acchi kavita hai ........ferwell yad aa gaya

raj ने कहा…

khubsurat kavita....yade boht keemtee hoti hai..rulati hai hansati hai...yado ko bnaye rakhe....

Aishwarya ने कहा…

fanatabulas

Aishwarya ने कहा…

fanatabulas

talent ने कहा…

आपने कॉलेज की यादें ताज़ा कर दी....धन्यबाद नवनीत जी..विदाई की घड़ियाँ करें नम येन आँखें, ये कैसे भुलायेंगे हम.
आप जो आये, खुशियाँ जो लाये, ये कैसे भुलायेंगे हम.

Suresh Godara ने कहा…

bahut khub
most liness...

Archana Chaurasia ने कहा…

mujhe apki ye kavita behad pasand aai.. ek nivedan he kya aap mujhe avadhi bhasha me yaa bhojpuri bhasha me koi kavita ya shayri shadi k bare me yaa bidai k bare me likhkar bhej skte he… apka bahut hi abhar hoga.. agar apki or se mujhe ye madad mil jaye.. mene na jane net pe kitne hi search kiye bt mujhe in sabse milta julta kuch naa mila.. kripya aap parinay patra me likhe jane wali shayri bhojpuri ya fir avdhi bhasha me bhej skte he yadi apki jankaari me aisa kuch he to.. plz plz plz meri madad kr dijiye…