शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

जगजीत के लिए.......


चली जा ऐ गजल जमाने से,
अब कोई तुम्हारा नहीं रहा,
कहां कोई कद्रदान यहां पर,
गुनगुनाए तुझे वो आवारा नहीं रहा,
मायूसियों को पाले चंद लोग,
मिल जाते है हर शब मयखाने में,
तुझ में डूब भूले जाये खुद को,
अब वो तेरा चाहने वाला नहीं रहा।

-नवनीत नीरव-

1 टिप्पणी:

Shilpa Shree ने कहा…

i too miss his voice....