बुधवार, 6 मई 2009

बहन के नाम .....

(आज मुझे अपनी बहन से मिले चार साल बीत गए हैं । उसी के लिए मैंने कुछ पन्तियाँ लिखी हैं)
कई पन्नों की दास्ताँ ,
अपने मन में समेटे हुए,
अक्सर स्नेहिल छाया देने की कोशिश में,
तुम असीम पीड़ा को सहती हुई चाहती रहीं,मुझे इस संसार की सारी खुशियाँ मिलें,
भूली -बिसरी यादों की कुछ मीठी बातें ,
जिन्हें मन चाहता है कहना,
इस धरा पर कहीं भी रहो,
हमेशा खुश रहना मेरी प्यारी बहना

-नवनीत नीरव-

3 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत हीं भावपूर्ण रचना.

गुलमोहर का फूल

Priya ने कहा…

Bahut sunder Rachna! Bhai-Behan ke pyare rishtey ko kam shabdo mein likh kar...jaise gagar mein sagar bhar diya ho

nivia ने कहा…

aaj muze apni sis yad aa gyi